कामद्रुम-रूपकः तथा शरीर-पुर-रूपकः
The Desire-Tree and the Body-as-City Metaphors
श्लाघधिने श्लाघनीयाय प्रशान्ताय तपस्विने,जो तत्त्वज्ञानकी अभिलाषा रखनेवाला, स्पृहणीय गुणोंसे युक्त, शान्तचित्त, तपस्वी एवं अनुगत शिष्य हो अथवा इन्हीं गुणोंसे युक्त प्रिय पुत्र हो, उसीको इस गूढ़ रहस्यमय धर्मका उपदेश देना चाहिये; दूसरे किसीको किसी प्रकार भी नहीं चक्षुरालोचनायैव संशयं कुरुते मन: । बुद्धिरध्यवसानाय साक्षी क्षेत्रज्ञ उच्चते
cakṣur ālocanāyaiva saṁśayaṁ kurute manaḥ | buddhir adhyavasānāya sākṣī kṣetrajña ucyate ||
العين إنما خُلقت للإبصار؛ أمّا الذهن (manas) فهو الذي يثير الشك. والعقل المميِّز (buddhi) وُضع للحسم والبتّ. وذلك الشاهد الباطن يُسمّى «عارف الحقل» (kṣetrajña).
व्यास उवाच