Doṣa-Parīkṣā and Guṇa-Viveka
Examination of Faults and Discernment of the Guṇas
यदा निर्गुणमाप्रोति ध्यानं मनसि पूर्वजम् । तदा प्रज्ञायते ब्रह्म निकषं निकषे यथा,परंतु जब साधक सबके आदिकारण निर्गुण ध्येयतत्त्वको ध्यानद्वारा अन्त:ःकरणमें प्राप्त कर लेता है, तब कसौटीपर कसे हुए सुवर्णके समान ब्रह्मके यथार्थ स्वरूपका ज्ञान होता है
قال بهيشما: إذا بلغ التأملُ الأوّل في الذهن مقامَ ما لا غونا له (نيرغونا)، عندئذٍ يُعرَف برهمان على حقيقته—كما يُعرَف الذهب إذا مُحِّص على حجر المحكّ.
भीष्म उवाच