कपोत-लुब्धकसंवादः — Hunter’s Remorse and Renunciatory Resolve
तान् विद्यावणिजो विद्धि राक्षसानिव भारत । व्याजेन सद्धिर्विहितो धर्मस्ते परिहास्यति,भरतनन्दन! ऐसे लोगोंको तुम विद्याका व्यापार करनेवाले तथा राक्षसोंके समान परद्रोही समझो। उनकी बहानेबाजीसे तुम्हारा सत्पुरुषोंद्वारा प्रतिपादित एवं आचरित धर्म नष्ट हो जायगा
يا ابنَ بهاراتا! اعلم أنّ أولئك تجّارُ علمٍ، كالرّاكشاسا، غادرون بالناس. وبحججهم المتذرّعة ومكرهم، سيغدو الدَّرما الذي سنّه الصالحون وساروا عليه موضعَ سخرية، ثم يندثر.
भीष्म उवाच