Daṇḍotpatti-kathana (Origin and Function of Daṇḍa) — वसुहोम–मान्धातृ संवाद
प्राणाश्न सर्वभूतानां नित्यमन्ने प्रतिष्ठिता: । तस्मात् प्रजा: प्रतिष्ठन्ते दण्डो जागर्ति तासु च,धर्मयुक्त श्रेष्ठ ब्राह्मण वेदोंका स्वाध्याय करते हैं। वेदोंसे ही यज्ञ प्रकट हुआ है। यज्ञ देवताओंको तृप्त करता है। तृप्त हुए देवता इन्द्रसे प्रजाके लिये प्रतिदिन प्रार्थना करते हैं, इससे इन्द्र प्रजाजनोंपर अनुग्रह करके (समयपर वर्षाके द्वारा खेती उपजाकर) उन्हें अन्न देता है, समस्त प्राणियोंके प्राण सदा अन्नपर ही टिके हुए हैं; इसलिये दण्डसे ही प्रजाओंकी स्थिति बनी हुई है। वही उनकी रक्षाके लिये सदा जाग्रत् रहता है
bhīṣma uvāca | prāṇāśn sarvabhūtānāṃ nityam anne pratiṣṭhitāḥ | tasmāt prajāḥ pratiṣṭhante daṇḍo jāgarti tāsu ca |
قال بهيشما: إن نَفَسَ الحياة في جميع الكائنات قائمٌ أبدًا على الطعام. لذلك يثبت الناس ويستقيم أمرهم؛ وعصا الحكم (داṇḍا)—قوة العقاب المشروع والحماية—تظل ساهرةً عليهم على الدوام.
भीष्म उवाच