Jaitrya-nimitta: Signs of Prospective Victory and the Priority of Conciliation (जयलक्षण-निमित्त तथा सान्त्व-प्रधान नीति)
तेषां सान्त्वं क्रूरमिश्रं प्रणेतव्यं पुनः पुन: । सम्पीड्यमाना हि परैयोंगमायान्ति सर्वतः,उन देशवासियोंके प्रति कठोरताके साथ-साथ सान्त्वनापूर्ण मधुर वचनोंका बारंबार प्रयोग करना चाहिये; अन्यथा केवल कठोर वचनोंसे पीड़ित हो वे सब ओरसे जाकर शत्रुओंके साथ मिल जाते हैं
قال بهيشما: «ينبغي أن تُساقَ لهم، مرة بعد مرة، كلماتُ تطييبٍ ممزوجةٌ بشيءٍ من الشدة. فإنهم إذا أُرهقوا بغلظة القول وحدها تفرّقوا من كل جهةٍ وانضمّوا إلى العدو.»
भीष्म उवाच