अध्याय ३: कृपस्य दुर्योधनं प्रति नीत्युपदेशः
Kṛpa’s Counsel to Duryodhana
यदि सर्वेजत्र तिष्ठामो ध्रुवं नो विजयो भवेत् | 'पाण्डवोंके पास थोड़ी-सी ही सेना शेष रह गयी है और श्रीकृष्ण तथा अर्जुन भी बहुत घायल हो चुके हैं। यदि हम सब लोग यहाँ डटे रहें तो निश्चय ही हमारी विजय होगी ।। ५२ कल || विप्रयातांस्तु वो भिन्नान् पाण्डवा: कृतकिल्बिषान्
«إن ثبتنا جميعًا هنا ثباتًا لا يتزعزع، فإن النصر سيكون لنا لا محالة. لم يبقَ لجيش الباندافا إلا القليل، وقد أُصيب شري كريشنا وأرجونا بجراحٍ بالغة. فإذا صمدنا في هذا الموضع، فالغلبة يقينًا لنا.»
संजय उवाच