ततः सुपुड्खेन सुयन्त्रितेन सुसंशिताग्रेण शरेण शूर: । आकर्णमुक्तेन समाहितेन युधामन्युस्तस्यथ शिरो जहार,तत्पश्चात् शूरवीर युधामन्युने धनुषको कानतक खींचकर ठीकसे संधान करके छोड़े हुए सुन्दर पंख और तीखी धारवाले सुनियन्त्रित बाणद्वारा चित्रसेनका मस्तक काट दिया
ثم إنّ البطل يودهامانيو أطلق سهماً ذا ريشٍ جميل، محكماً موجهاً، حادَّ الطرف مصقولَ الحدّ، بعد أن شدّ القوس حتى الأذن وثبّت ذهنه؛ فبذلك السهم قطع رأسَ تشيتراسينا.
संजय उवाच