कर्णपर्व — चतुर्दशोऽध्यायः
Arjuna’s Suppression of the Saṃśaptakas; Kṛṣṇa’s Strategic Admonition; Battlefield Inventory
युद्धानामति सर्वेषां युद्धमेतदिति प्रभो । सर्वयुद्धानि चैतस्य कलां नाहन्ति षोडशीम्,प्रभो! महाराज! उस समय वहाँ उड़कर आते हुए सिद्ध परस्पर इस प्रकार कहने लगे --“यह युद्ध तो सभी युद्धोंसे बढ़कर हो रहा है, अन्य सब युद्ध तो इसकी सोलहवीं कलाके भी बराबर नहीं थे
«يا مولاي! هذه الحرب تفوق كل الحروب، وكل الحروب لا تبلغ حتى سدسَ عشرِها.»
संजय उवाच