Droṇa-parva Adhyāya 94: Sātyaki–Sudarśana Yuddha (सात्यकि–सुदर्शन युद्ध)
वासुदेवं त्रिभिविद्ध्वा पुन: पार्थ च पञ्चभि: । तस्य पार्थो धनुश्छित्त्वा केतुं चिच्छेद मारिष,वसुदेवनन्दन श्रीकृष्णको तीन बाणोंसे घायल करके उसने अर्जुनपर पुनः पाँच बाणोंका प्रहार किया। आर्य! तब अर्जुनने उसका धनुष काटकर उसकी ध्वजाके टुकड़े- टुकड़े कर दिये
قال سانجيا: طعن فاسوديفا (شري كريشنا) بثلاثة سهام، ثم عاد فضرب بارثا (أرجونا) بخمسة سهام. يا موقَّر! عندئذٍ قطع أرجونا قوسه ومزّق رايته (كيتو) إربًا إربًا.
संजय उवाच