धृतराष्ट्रस्य मूर्च्छा तथा द्रोणविषयकप्रश्नाः
Dhṛtarāṣṭra’s Fainting and Questions Concerning Droṇa
श्रुत्वा हतं रुक्मरथं वैयातच्रपरिवारितम् । जातरूपशिरस्त्राणं नाद्य शोकमपानुदे,व्याप्रचर्मसे आच्छादित सुवर्णमय रथपर आरूढ़ हो सुनहरा शिरस्त्राण (टोप या पगड़ी) धारण करनेवाले द्रोणाचार्यको मारा गया सुनकर आज मैं अपने शोकको किसी प्रकार दूर नहीं कर पाता हूँ
«حين سمعتُ أن دْرُونَا—راكبَ عربةٍ مذهّبة، محاطًا بوقايةٍ من الدروع، لابسًا خوذةً من ذهب—قد قُتِل، لم أستطع اليوم أن أدفع عن نفسي الحزنَ بأي وجه.»
धृतराष्ट उवाच