Previous Verse
Next Verse

Shloka 373

Omens and Consolation after Loss; Reaffirmation of the Saindhava Punishment Vow (उत्पात-दर्शनम्, आश्वासन-वाक्यानि, प्रतिज्ञा-स्थैर्यम्)

तवाज्ञा मूर्थ्नि मे न्‍्यस्ता यत्‌ ते वक्ष्यामि तच्छुणु । 'प्रभो! यदि इस प्रकार यह कार्य मेरे बिना नहीं हो सकता तो आपकी आज्ञा मैंने शिरोधार्य कर ली है, परंतु इसके विषयमें मैं आपसे जो कुछ कहती हूँ, उसे (ध्यान देकर) सुनिये

«يا مولاي! لقد جعلتُ أمرك على رأسي. فإن كان هذا العمل لا يتمّ من دوني، فاستمع بإمعان إلى ما سأقوله لك.»

नारद उवाच