Jayadrathasya śoka-bhaya-vilāpaḥ — Droṇena āśvāsanaṃ ca
Jayadratha’s lament and Droṇa’s reassurance
नागायुतबलाश्षान्ये वायुवेगबलास्तथा । त एते निहता: संख्ये तुल्यरूपा नरैर्नरा:,इनमेंसे कितने ही राजा दस हजार हाथियोंके समान बलवान् थे तथा कितनोंके वेग और बल वायुके समान थे। ये सब मनुष्य एक समान रूपवाले हैं, जो दूसरे मनुष्योंद्वारा युद्धमें मार डाले गये हैं
كان فيهم ملوكٌ تبلغ قوتهم قوةَ عشرة آلاف فيل، وفيهم من كانت سرعته وبأسه كالرّيح. غير أنّهم جميعًا—إنسانًا بعد إنسان—قُتلوا في المعركة بأيدي بشرٍ مثلهم، فاستووا الآن في الهيئة.
युधिछिर उवाच