द्रोणपुत्रस्याग्नेयास्त्रप्रयोगः — अर्जुनस्य ब्राह्मास्त्रप्रतिघातः — व्यासोपदेशः
Aśvatthāmā’s Agneyāstra, Arjuna’s Brāhmāstra Counter, and Vyāsa’s Instruction
बलार्णवी ततस्तौ तु समेयातां निशामुखे । वातोद्धूतौ क्षुब्धसत्त्वी भैरवी सागराविव,जैसे वायुके वेगसे उद्वेलित तथा विक्षुब्ध जल-जन्तुओंसे भरे हुए दो भयंकर समुद्र एक-दूसरेसे मिल रहे हों, उसी प्रकार उस रात्रिके समय वे सागर-सदृश दोनों सेनाएँ एक- दूसरेसे भिड़ गयीं
ثم عند مُقبِلِ الليل التقتِ الجيوشان، وهما كالبحرين في سَعَتهما، فاصطدم أحدهما بالآخر؛ كبحرين هائجين مُروَّعين، قد أثارتهما الرياح فاضطربت أمواجهما وامتلآ بكائنات الماء المتلاطمة، يلتقيان فيتصادمان.
संजय उवाच