द्रोणपर्व — अध्याय १६२: प्रातःसंध्यायां युद्धप्रवृत्तिः तथा रजोमेघे संमूढता
ननाद सुमहानादं तपान्ते जलदो यथा । इस प्रकार रणभूमिमें शत्रुओंको जीतकर महारथी द्रोणपुत्र वर्षाकालके मेघके समान जोर-जोरसे गर्जना करने लगा
nanāda sumahānādaṃ tapānte jalado yathā |
قال سانجايا: بعدما قهر الأعداء في ساحة القتال، أطلق ابنُ درونا—ذلك المحاربُ العظيمُ على العربة—زئيرًا هائلًا، كالرعد في سحابةِ المطر عند انقضاء القيظ.
संजय उवाच