वासवी-शक्तेः प्रयोगः, घटोत्कच-वधोत्तर-शोकः, व्यासोपदेशश्च
The Vāsavī Spear’s Use, Post-Ghaṭotkaca Grief, and Vyāsa’s Counsel
स ग्ग्ध्वाक्षौहिणीं बाणैर्नैतीं रुकुचे नृप । पुरेव त्रिपुरं दग्ध्वा दिवि देवो महेश्वर:,नरेश्वर! जैसे भगवान् महेश्वर आकाशमें त्रिपुरको दग्ध करके सुशोभित हुए थे, उसी प्रकार राक्षसोंकी अक्षौहिणी सेनाको बाणोंद्वारा दग्ध करके अअभ्वत्थामा शोभा पाने लगा
يا ملكَ البشر! لما أحرق أشْوَتْثَامَا بسهامه جيشَ الأَكْشَوْهِني من الرّاكشَسَة، بدا متلألئًا بالمجد—كما تلألأ مهيشْوَرا حين أحرق تْرِيبُورَا في السماء.
संजय उवाच