धृष्टद्युम्नस्य द्रोणाभिमुख्यं तथा सात्यकि-कर्ण-समागमः
Dhṛṣṭadyumna’s advance toward Droṇa and the Sātyaki–Karṇa confrontation
संग्रामाणां हि धर्मज्ञ: सर्वशास्त्रार्थपारग: । न चाधर्ममहं कुर्या जानंश्वैव हि मुहासे,मैं संग्रामके धर्मोंको जानता हूँ और सम्पूर्ण वेद-शास्त्रोंके अर्थज्ञानमें पारंगत हूँ। मैं किसी प्रकार अधर्म नहीं कर सकता; यह जानते हुए भी तुम मेरे विषयमें मोहित हो रहे हो
إني عارفٌ بدَرْمَةِ القتال، مُحيطٌ بمعاني الفيدا والكتب كلِّها. لا يمكنني أن أرتكب الأدهرما؛ ومع ذلك، وأنت تعلم هذا، ما زلتَ واقعًا في الوهم بشأنِي.
अर्जुन उवाच