रात्रौ युद्धप्रवृत्तिः — Night Battle Begins; Duryodhana’s Protective Orders for Droṇa
Droṇa-parva 139
स ताम्रनयन: क्रोधाच्छवसन्निव महोरग: । बभौ कर्ण: शरानस्यन् रश्मीनिव दिवाकर:,उसकी आँखें क्रोधसे लाल हो रही थीं और वह फुफकारते हुए महान् सर्पके समान उच्छवास खींच रहा था। उस समय बाणोंकी वर्षा करता हुआ कर्ण अपनी किरणोंका प्रसार करते हुए सूर्यदेवके समान शोभा पा रहा था
احمرّت عينا كارنا كالنحاس من شدة الغضب، وكان يزفر زفيرًا كزفير أفعى عظيمة. وفي تلك اللحظة، وهو يمطر السهام مطرًا، بدا كارنا متألقًا كإله الشمس حين يبسط أشعته.
संजय उवाच