Droṇa’s Rebuke to Duryodhana after Jayadratha’s Fall (द्रोणेन दुर्योधनं प्रति प्रत्युक्तिः)
स्वर्गेप्सवो मित्रकार्ये नाभ्यनन्दन्त जीवितम् । वे उत्तम तेजवाले नरेश स्वर्गलोक प्राप्त करना चाहते थे। अतः उन्हें युद्धमें शस्त्रोंद्वारा मृत्यु आनेकी अभिलाषा थी। इसीलिये उन्होंने मित्रका कार्य सिद्ध करनेके प्रयत्नमें अपने प्राणोंकी परवा नहीं की
إنّ الذين ابتغوا السماء، ليُتمّوا واجب الصديق، لم يفرحوا بالحياة. أولئك الأبطال ذوو البهاء الرفيع أرادوا بلوغ عالم السماء؛ لذلك تمنّوا أن تأتيهم المنيّة في ساحة الحرب بسلاحٍ يقطع. ومن ثمّ، في سعيهم لإنجاز أمر الصديق، لم يبالوا بأرواحهم.
संजय उवाच