धर्मराजस्य चिन्ता, भीमसेनप्रेषणम्, द्रोणानीकप्रवेशप्रयत्नः
Yudhiṣṭhira’s Anxiety and the Dispatch of Bhīma; Attempted Breakthrough into Droṇa’s Formation
ततः शीघ्रतरं प्रायात् पाण्डव: सैन्धवं प्रति । विवर्तमाने तिग्मांशौ हृष्टे: पीतोदकै्हयै:,तदनन्तर पानी पीकर हर्ष और उत्साहमें भरे हुए घोड़ोंद्वारा पाण्डुकुमार अर्जुन सिन्धुराज जयद्रथकी ओर बड़े वेगसे बढ़ने लगे। उस समय सूर्यदेव अस्ताचलके शिखरकी ओर ढलते चले जा रहे थे
ثم انطلق ابن باندو (أرجونا) مسرعًا أسرعَ من ذي قبل نحو السَّيْندَهَفَة (جَيَدْرَثَة). وكان سُورْيَا، ذو الأشعة الحادّة، يميل إلى ذروة جبل المغيب، والخيول—وقد شربت الماء وامتلأت فرحًا وحماسة—تندفع به إلى الأمام اندفاعًا عظيمًا.
संजय उवाच