भीष्मस्य भीमसेन-निरोधः
Bhīṣma checks Bhīmasena; matched engagements intensify
/ [दाक्षिणात्य अधिक पाठका इं श्लोक मिलाकर कुल ८७६ “लोक हैं।] नीफजशार (0) आज असन- पञज्चषष्टितमो< ध्याय: धृतराष्ट्र-संजय-संवादके प्रसंगमें दुर्योधनके द्वारा पाण्डवोंकी विजयका कारण पूछनेपर भीष्मका ब्रह्माजीके द्वारा की हुई भगवत्-स्तुतिका कथन धृतराष्ट उवाच भयं मे सुमहज्जातं विस्मयश्वैव संजय । श्रुत्वा पाण्डुकुमाराणां कर्म देवै: सुदुष्करम्,धृतराष्ट्र बोले--संजय! पाण्डवोंका देवताओंके लिये भी दुष्कर पराक्रम सुनकर मुझे बड़ा भारी भय और विस्मय हो रहा है
dhṛtarāṣṭra uvāca | bhayaṁ me sumahaj jātaṁ vismayaś caiva sañjaya | śrutvā pāṇḍu-kumārāṇāṁ karma devaiḥ suduṣkaram ||
قال دِهْرِتَرَاشْتْرَ: «يا سنجيا، لقد قام في نفسي خوفٌ عظيم، ومعه دهشةٌ أيضًا، حين سمعتُ بأعمال أبناء باندو—مآثرَ يعسر إنجازها حتى على الآلهة.»
धृतराष्ट उवाच