भीष्मपर्व — अध्याय ६२: वासुदेवमहात्म्यप्रशंसा (देव–ब्रह्मसंवादः)
अथीैनं रथवृन्देन कोष्ठकीकृत्य भारत । शरै: सुबहुसाहस्रै: समन्तादभ्यवारयन्,भरतनन्दन! उन राजाओंने रथसमूहद्वारा अर्जुनको सब ओरसे वेष्टित करके उनके ऊपर अनेक सहस्र बाणोंकी वर्षा आस्मभ की
athaivainaṁ rathavṛndena koṣṭhakīkṛtya bhārata | śaraiḥ subahusahasraiḥ samantād abhyavārayan ||
قال سانجيا: ثم، يا بهاراتا، أحاط أولئك الملوك بأرجونا بحشدٍ من العربات كأنهم يحبسونه في حظيرة، فكبحوا حركته من كل جانب وأمطروه بآلاف السهام.
संजय उवाच