Rajo-dhūli-saṃmūḍha-saṅgrāmaḥ
The Dust-Obscured Battle and Mutual Charges
स हि वीरो<नुरक्तश्न वृद्ध: कुरुपतिस्तदा । संजय! सेनापति श्वेत युद्धमें मारे गये। उनकी रक्षाके लिये प्रयत्न करनेपर भी शत्रुओंको पलायन करना पड़ा तथा अपने पक्षकी विजय हुई--से सब बातें सुनकर मेरे मनमें बड़ी प्रसन्नता हो रही है। शत्रुओंके प्रतीकारका उपाय सोचते हुए मुझे अपने पक्षके द्वारा की गयी अनीतिका स्मरण करके भी लज्जा नहीं आती है। वे वृद्ध एवं वीर कुरुराज भीष्म हमपर सदा अनुराग रखते हैं (इस कारण ही उन्होंने श्वेतके साथ ऐसा व्यवहार किया होगा) | २-३ ह || कृतं वैरं सदा तेन पितु: पुत्रेण धीमता
dhṛtarāṣṭra uvāca | sa hi vīro 'nuraktaś ca vṛddhaḥ kurupatiḥ tadā | sañjaya! senāpatiḥ śveto yuddhe me māritaḥ | kṛtaṃ vairaṃ sadā tena pituḥ putreṇa dhīmatā ||
قال دِهْرِتَرَاشْتْرَا: «إنّ ذلك البطل الشيخ، سيدَ الكورو، كان يومئذٍ حقًّا مُخْلِصًا لنا. يا سَنْجَيَا، لقد قُتِلَ قائدي شْفِيتا (Śveta) في ساحة القتال. وهكذا فقد أرسى ذلك الابنُ الحكيمُ عداوةً راسخةً على الأب.»
धृतराष्ट उवाच