एवं ब्रुवति विप्रेन्द्रे धृतराष्ट्रीडम्बिकासुतः । आक्षिप्य वाक्यं॑ वाक्यज्ञो वाक््यं चैवाब्रवीत् पुन:,विप्रवर व्यासजी जब इस प्रकार उपदेश दे रहे थे, उसी समय बोलनेमें चतुर अम्बिकानन्दन धृतराष्ट्रने बीचमें ही उनकी बात काटकर उनसे इस प्रकार कहा
وبينما كان ذلك البراهمن الجليل يتكلم على هذا النحو، قاطعه دْهْرِتَرَاشْتْرَةُ ابنُ أَمْبِكَة، وهو الحاذق بفنون القول، ثم عاد فقال على النحو الآتي.
वैशम्पायन उवाच