भीष्मस्य शरवर्षः — Bhīṣma’s Arrow-Storm and Kṛṣṇa’s Impulse to Intervene
वेदयन्त्यो महाराज महद् वैशसमागतम् । दिश: प्रज्वलिता राजन् पांसुवर्ष पपात च,महाराज! वे गीदड़ियाँ सिरपर आये हुए विकट विनाशकी सूचना दे रही थीं। राजन! दिशाएँ जलती प्रतीत होने लगीं। सब ओर धूलकी वर्षा होने लगी। रक्तमिश्रित हड्डियाँ बरसने लगीं। रोते हुए वाहनोंके नेत्रोंसे आँसू गिरने लगे
vedayantyo mahārāja mahad vaiśasam āgatam | diśaḥ prajvalitā rājan pāṃsuvarṣa papāta ca ||
قال سنجيا: «أيها الملك العظيم، كانت النُّذُر المشؤومة تُعلن أن كارثةً جسيمة قد حلّت. أيها الحاكم، بدت الجهات كأنها تشتعل، وهطل غبارٌ في كل مكان».
संजय उवाच