Jaratkāru’s Conditional Marriage Vow and Vāsuki’s Offer (जरत्कारु-विवाह-नियमः)
सो<हं पश्यामि वक्तव्यं त्वयि धर्मभूतां वर । पुत्रत्वं बालतां चैव तवावेक्ष्य च साहसम्,(किंतु यह क्रोध धर्मका नाशक होता है) इसलिये धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ पुत्र! तुम्हारे बचपन और दुःसाहसपूर्ण कार्यको देखकर मैं तुम्हें कुछ कालतक उपदेश देनेकी आवश्यकता समझता हूँ
«لذلك أرى أن عليّ أن أقول لك ما ينبغي، يا بُنيّ، يا أكرمَ أبناء أهل الدharma. إذ أنظر إلى حداثة سنّك، وإلى جرأتك المتهوّرة—(فإن هذا الغضب مُهلكٌ للدharma)—أرى لزامًا أن أؤدّبك وأعظك زمنًا.»
शमीक उवाच