Varuṇa’s Bestowal of the Gāṇḍīva and the Arming of Kṛṣṇa–Arjuna
Khāṇḍava Prelude
तस्य सर्वा वयं वीर श्रुत्वा वाक्यमिहागता: । तदिदं सत्यमेवाद्य मोक्षिताहं त्वयानघ,“वहाँ पुरुषोंमें श्रेष्ठ शुद्धात्मा पाण्डुकुमार धनंजय शीघ्र ही पहुँचकर तुम्हें इस दुःखसे छुड़ायेंगे, इसमें संशय नहीं है।' वीर अर्जुन! नारदजीका यह वचन सुनकर हम सब सखियाँ यहीं चली आयीं। अनध! आज सचमुच ही आपने मुझे उस शापसे मुक्त कर दिया
tasya sarvā vayaṃ vīra śrutvā vākyam ihāgatāḥ | tad idaṃ satyam evādya mokṣitāhaṃ tvayānagha ||
أيها البطل، لما سمعنا قوله جئنا جميعًا إلى هنا. واليوم قد تبيّن صدق ذلك القول حقًّا: يا من لا إثم عليه، لقد أطلقتني حقًّا من تلك اللعنة.
ब्राह्मण उवाच