आदि पर्व — खाण्डवदाह प्रसङ्गः: पावकस्य याचनं तथा इन्द्रवर्षनिवारणोपायः
Adi Parva — Khāṇḍava episode: Agni’s request and the means to resist Indra’s rain
किमर्थ च महत् पापमिदं कृतवती पुरा | राजन्! वह दिव्यरूपिणी मनोरमा रमणी अपनी अद्भुत कान्तिसे प्रकाशित हो रही थी। यह महान् आश्चर्यकी बात देखकर कुन्तीनन्दन धनंजय बड़े प्रसन्न हुए और उस स्त्रीसे इस प्रकार बोले--“कल्याणी! तुम कौन हो और कैसे जलचरयोनिको प्राप्त हुई थी? तुमने पूर्वकालमें ऐसा महान् पाप किसलिये किया जिससे तुम्हारी यह दुर्गति हुई?” ।। १३-१४ ३ || वर्गोवाच अप्सरास्मि महाबाहो देवारण्यविहारिणी,वर्गा बोली--महाबाहो! मैं नन्दनवनमें विहार करनेवाली एक अप्सरा हूँ
kīmarthaṃ ca mahat pāpam idaṃ kṛtavatī purā | rājan |
قال فايشَمبايانا: «أيها الملك، لأيّ سببٍ ارتكبتْ في الزمن السالف هذا الإثم العظيم؟» (وقد جاء هذا السؤال لأن أرجونا تعجّب من امرأةٍ متلألئةٍ ذات هيئةٍ إلهية، لكنها سقطت في مولدٍ مائيّ، فسأل: أيُّ ذنبٍ قديم جرّ عليها هذه المهانة؟)
वैशम्पायन उवाच