कर्णस्य मन्त्रः — Duryodhana-प्रति नीति-विचारः
Karna’s Counsel on Strategy toward the Pāṇḍavas
दुपद उवाच त्वंच कुन्ती च कौन्तेय धृष्टद्युम्नश्व मे सुतः । कथयन्त्विति कर्तव्यं श्व:ः काले करवामहे,द्रुपद बोले--कुन्तीनन्दन! तुम, कुन्तीदेवी और मेरा पुत्र धृष्टद्युम्न--ये सब लोग मिलकर यह निश्चय करके बतायें कि क्या करना चाहिये? उसे ही कल ठीक समयपर हमलोग करेंगे
قال دروبادا: «يا ابن كونتي (كاونتيا)، أنت وكونتي وابني دْهْرِشْتَدْيُومْنَة، اجتمعوا وقرّروا ثم أخبروني بما ينبغي فعله. وما تُجمعون عليه سنُجريه غدًا في وقته.»
दुपद उवाच