संवरणस्य पतनं, सचिवोपचारः, वसिष्ठस्य सूर्योपगमनम्
Saṃvaraṇa’s Collapse, Ministerial Aid, and Vasiṣṭha’s Approach to Sūrya
शूद्रं तु मोचयेद् राजा शरणार्थिनमागतम् । प्राप्नोतीह कुले जन्म सद्द्वव्ये राजपूजिते,इसी प्रकार जो राजा अपनी शरणमें आये हुए शूद्रको प्राणसंकटसे बचाता है, वह इस संसारमें उत्तम धन-धान्यसे सम्पन्न एवं राजाओंद्वारा सम्मानित श्रेष्ठ कुलमें जन्म लेता है
«وكذلك، فإنّ الملكَ الذي يُنقذ شُودْرًا جاء طالبًا الملجأ من خطر الموت، ينال في هذا العالم مولدًا في سلالةٍ كريمة، وافرةِ المالِ والزرع، مُكرَّمةٍ لدى الملوك.»
युधिछिर उवाच