Vāraṇāvata-prasaṃsā and the Pāṇḍavas’ Departure (वरणावत-प्रशंसा तथा पाण्डव-प्रयाणम्)
यच्च ते प्रार्थितं ब्रह्मन् कृतं तदिति चिन्त्यताम् । दिष्ट्या प्राप्तोडसि विप्रर्षे महान् मेडनुग्रह: कृत:,ब्रह्म! आपने जो माँग की है, उसे पूर्ण हुई समझिये। ब्रह्मर्ष] आप आये, यह हमारे लिये बड़े सौभाग्यकी बात है। आपने यहाँ पधारकर मुझपर महान् अनुग्रह किया है
وأما ما طلبته، أيها البراهمن، فليُعَدَّ كأنه قد أُنجِز. وبحُسن الطالع، أيها الرِّشي العظيم، لقد قدمتَ إلينا؛ وإن قدومك لنعمةٌ كبرى علينا. وبمجيئك إلى هنا منحتني إحسانًا عظيمًا.
भीष्म उवाच