Ruru–Ḍuṇḍubha Saṃvāda: Śāpa, Mokṣa, and Ahiṃsā-Upadeśa
Chapter 11
तस्मात् प्राणभूत:ः सर्वान् न हिंस्याद् ब्राह्मण: क्वचित् | ब्राह्मण: सौम्य एवेह भवतीति परा श्रुति:,“अतः ब्राह्मणको समस्त प्राणियोंमेंसे किसीकी कभी और कहीं भी हिंसा नहीं करनी चाहिये। ब्राह्मण इस लोकमें सदा सौम्य स्वभावका ही होता है, ऐसा श्रुतिका उत्तम वचन है
فلذلك لا ينبغي للبراهمي أن يؤذي أيَّ كائنٍ حيٍّ قطّ، لا في زمانٍ ولا في مكان. والبراهمي في هذا العالم إنما يكون دائمًا لطيفَ الطبع، هكذا جاء القولُ الأعلى في الشروتي (Śruti).
डुण्ड्रुभ उवाच