अनुक्रमणिकाध्यायः (Anukramaṇikā Adhyāya) — Invocation, Narrator Frame, and Textual Scope
इतिहासा: सवैयाख्या विविधा: श्रुतयोडपि च । इह सर्वमनुक्रान्तमुक्तं ग्रन्थस्य लक्षणम्,उन्होंने ही इस महाभारत ग्रन्थमें, व्याख्याके साथ उस सब इतिहासका तथा विविध प्रकारकी श्रुतियोंके रहस्य आदिका पूर्णरूपसे निरूपण किया है और इस पूर्णताको ही इस ग्रन्थका लक्षण बताया गया है
إن الإيتيهاسا (itihāsa) مع شروحها، وكذلك أسرار شتّى الشروتي (śruti)—كل ذلك قد سِيق هنا وتُلي بيانُه على وجه الكمال؛ وهذه الشمولية هي سِمة هذا المصنَّف.