अनुक्रमणिकाध्यायः (Anukramaṇikā Adhyāya) — Invocation, Narrator Frame, and Textual Scope
बहूनि सम्परिक्रम्य तीर्थान्यायतनानि च | समनतपजञ्चकं नाम पुण्यं द्विजनिषेवितम्,मैं बहुत-से तीर्थों एवं धामोंकी यात्रा करता हुआ ब्राह्मणोंके द्वारा सेवित उस परम पुण्यमय समन्तपंचक क्षेत्र कुरुक्षेत्र देशमें गया, जहाँ पहले कौरव-पाण्डव एवं अन्य सब राजाओंका युद्ध हुआ था
وقد طُفتُ بكثيرٍ من التيَرثاتِ (المعابر المقدّسة) والمقاماتِ والمعابد، حتى بلغتُ سَمَنْتَپَنْچَكَ، تلك البقعةَ الطاهرةَ العظيمةَ البركة، التي يخدمها ويؤمّها ذوو الولادتين (البراهمة).