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Shloka 52

Rāma’s Service to Parents and Departure to Visit the Paternal Grandparents

Pitāmaha-gṛha-gamana

ददर्श परितो राजन्मुनिशिष्यशतावृतम् / व्याख्यानवेदिकामध्ये निविष्टं कुशविष्टरे / सितश्मश्रुजटाकूर्चब्रह्मसूत्रोपशोभितम्

dadarśa parito rājanmuniśiṣyaśatāvṛtam / vyākhyānavedikāmadhye niviṣṭaṃ kuśaviṣṭare / sitaśmaśrujaṭākūrcabrahmasūtropaśobhitam

يا أيها الملك! رأى راما المُنيَّ محاطًا بمئةٍ من التلاميذ؛ جالسًا في وسط منصة الشرح على مقعدٍ من عشب الكوشا، متزيّنًا بلحيةٍ بيضاء وجدائل الجَتا وحزمة كوشا وبالخيط المقدّس، البرهمسوتر.

ददर्शsaw
ददर्श:
क्रिया (मुख्य)
TypeVerb
Root√दृश् (धातु)
Formलिट् (Perfect/परोक्षभूत), प्रथमपुरुष (3rd), एकवचन; परस्मैपद
परितःall around
परितः:
अधिकरण (स्थान)
TypeIndeclinable
Rootपरितः (अव्यय)
Formअव्यय; क्रियाविशेषण (around)
राजन्O king
राजन्:
सम्बोधन (Vocative/सम्बोधन)
TypeNoun
Rootराजन् (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, सम्बोधन (8), एकवचन
मुनि-शिष्य-शत-आवृतम्surrounded by a hundred disciples of sages
मुनि-शिष्य-शत-आवृतम्:
विशेषण (कर्म-विशेषण)
TypeAdjective
Rootमुनि (प्रातिपदिक) + शिष्य (प्रातिपदिक) + शत (प्रातिपदिक) + आवृत (कृदन्त; आ+√वृ धातु, क्त)
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया (2), एकवचन; भूतकर्मणि कृदन्त (क्त); समासः—तत्पुरुषः (मुनिशिष्यशतेन आवृतम्)
व्याख्यान-वेदिका-मध्येin the middle of the teaching-platform
व्याख्यान-वेदिका-मध्ये:
अधिकरण (Location/अधिकरण)
TypeNoun
Rootव्याख्यान (प्रातिपदिक) + वेदिका (प्रातिपदिक) + मध्य (प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग, सप्तमी (7), एकवचन; समासः—तत्पुरुषः (व्याख्यानवेदिकायाः मध्ये)
निविष्टम्seated
निविष्टम्:
विशेषण (कर्म-विशेषण)
TypeAdjective
Rootनि + √विश् (धातु) + क्त (कृदन्त)
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया (2), एकवचन; भूतकर्मणि कृदन्त (क्त)
कुश-विष्टरेon a seat of kuśa grass
कुश-विष्टरे:
अधिकरण (Location/अधिकरण)
TypeNoun
Rootकुश (प्रातिपदिक) + विष्टर (प्रातिपदिक)
Formपुंलिङ्ग, सप्तमी (7), एकवचन; समासः—तत्पुरुषः (कुशानां विष्टरः)
सित-श्मश्रु-जटा-कूर्च-ब्रह्मसूत्र-उपशोभितम्adorned with white beard, matted locks, a hair-tuft, and the sacred thread
सित-श्मश्रु-जटा-कूर्च-ब्रह्मसूत्र-उपशोभितम्:
विशेषण (कर्म-विशेषण)
TypeAdjective
Rootसित (प्रातिपदिक) + श्मश्रु (प्रातिपदिक) + जटा (प्रातिपदिक) + कूर्च (प्रातिपदिक) + ब्रह्मसूत्र (प्रातिपदिक) + उपशोभित (कृदन्त; उप+√शुभ् धातु, क्त)
Formनपुंसकलिङ्ग, द्वितीया (2), एकवचन; भूतकर्मणि कृदन्त (क्त); समासः—तत्पुरुषः (सितश्मश्रुजटाकूर्चब्रह्मसूत्रैः उपशोभितम्)