मनः प्रसृजते भावं बुद्धिर् अध्यवसायिनी हृदयं प्रियम् एवेह त्रिविधा कर्मचोदना //
ينبغي تلاوة هذا البيت (رقم ٦٥) بمحبة وخشوع لنيل البركة والحكمة.