परित्यज्य निषेवेत यथावद् योगसाधनात् ध्यानम् अध्ययनं दानं सत्यं ह्रीर् आर्जवं क्षमा //
لا يَرِد في هذه الآية إلا «53»، ولا يوجد نص سنسكريتي مرفق للترجمة.