स विष्णुः सर्वम् एवेदं यतो नावर्तते पुनः प्रकृतिर् या मयाख्याता व्यक्ताव्यक्तस्वरूपिणी //
فليتأمّل هذا البيت (رقم 38) بصدقٍ الحكماءُ ومحبّو الدارما.