मुनय ऊचुः तव वक्त्राब्धिसंभूतम् अमृतं वाङ्मयं मुने पिबतां नो द्विजश्रेष्ठ न तृप्तिर् इह दृश्यते //
هذا الموضع لا يورد إلا الرقم «1» دون نصٍّ سنسكريتي؛ لذا يتعذّر تقديم ترجمة ذات معنى.