उत्तर उवाच य एष जाम्बूनदशुद्धगौर- तनुर्महान् सिंह इव प्रवृद्धः । प्रचण्डघोण: पृथुदीर्घनेत्र- स्ताम्रायताक्ष: कुरुगाज एष:,उत्तर बोले--पिताजी! विशुद्ध जाम्बूनद नामक सुवर्णके समान जिनका गौर शरीर है, जो सबसे बड़े और सिंहके समान हृष्ट-पुष्ट हैं, जिनकी नाक लंबी और बड़े-बड़े नेत्र कुछ लालिमा लिये कानोंतक फैले हुए हैं, ये ही कुरुकुलनरेश महाराज युधिष्ठिर हैं
uttara uvāca ya eṣa jāmbūnadaśuddhagauratanur mahān siṁha iva pravṛddhaḥ | pracaṇḍaghoṇaḥ pṛthudīrghanetraḥ tāmrāyatākṣaḥ kurugāja eṣaḥ ||
乌多罗说道:“父王,这一位——肤色皎洁,纯净如阎浮那陀金;身形伟岸,强健如壮狮;鼻梁高挺,双目宽长,目光微带铜红——此人正是俱卢族之王,摩诃罗阇·由提施提罗。”
उत्तर उवाच