वैशम्पायन उवाच परिहासेप्सया वाकक््यं विराटस्य निशम्य तत् | स्मयमानोडर्जुनो राजन्निदं वचनमत्रवीत्,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! मानो परिहास करनेके लिये कहा गया हो, ऐसा विराटका वह वचन सुनकर अर्जुन मुसकराते हुए इस प्रकार बोले
vaiśampāyana uvāca | parihāsepsayā vākyam virāṭasya niśamya tat | smayamāno 'rjuno rājan idaṁ vacanam abravīt ||
毗湿摩耶那说:大王(阇那梅阇耶)啊,听到毗罗吒那番话,仿佛带着戏谑之意,阿周那含笑答道如下。
वैशम्पायन उवाच