Adhyāya 61: Saṃmohana-astra and the Kuru Withdrawal (संमोहनास्त्रं तथा कुरुनिवृत्तिः)
पाणिपादशिर:पृष्ठबाहुशाखानिरन्तरम् । वनं कुरूणां छेत्स्यामि शरै: संनतपर्वभि:,“आज झुकी हुई गाँठवाले बाणोंद्वारा कौरवसेनारूपी जंगलको काट डालूँगा। हाथ, पैर, सिर, पृष्ठ (पीठ) तथा बाहु आदि अड़ ही विविध शाखाओंके रूपमें फैलकर इस कौरव-वनको सघन किये हुए हैं
pāṇipādaśiraḥpṛṣṭhabāhuśākhānirantaram | vanaṃ kurūṇāṃ chetsyāmi śaraiḥ saṃnataparvabhiḥ ||
毗舍波耶那说道:“以关节弯曲之箭,我将砍伐俱卢大军,如伐一片森林——那森林因枝桠化作手、足、首、背与臂而愈加稠密。”
वैशम्पायन उवाच