वैशम्पायन उवाच इति कर्ण ब्रुवन्नेव बीभत्सुरपराजित: । अभ्ययाद् विसृजन् बाणान् कायावरणभेदिन:,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! अर्जुन किसीसे भी परास्त होनेवाले नहीं थे। वे कर्णसे उपर्युक्त बातें कहकर कवचको भी विदीर्ण कर देनेवाले बाण छोड़ते हुए उसकी ओर बढ़े
毗湿摩衍那说道:“毗婆蹉(阿周那)如此对迦尔那说罢——他本非轻易可败之人——便一边逼近,一边放出能穿透甲胄、裂破身躯的利箭。”
वैशम्पायन उवाच