प्राच्छादयदमेयात्मा पार्थ: शरशतै: कृपम् | स शरैररदित: क्रुद्ध: शितैरग्निशिखोपमै:,तदनन्तर अचिन्त्य मन-बुद्धिवाले पृथापुत्र अर्जुनने सैकड़ों बाण मारकर कृपाचार्यको ढँक दिया। आगकी लपटोंके समान जलानेवाले उन तीखे बाणोंसे पीड़ित होनेपर कृपाचार्यको बड़ा क्रोध हुआ
随后,帕尔塔(阿周那)这位神威莫测之人,以数百支箭矢遮没克利帕。克利帕被那些锋利如火焰之舌的箭所灼伤,痛楚之下,怒意大作。
वैशम्पायन उवाच