द्रोण-पार्थ-युद्धम्
Droṇa–Pārtha Strategic Engagement
एष व्यवस्थितो द्रोणो द्रौणिश्व तदनन्तरम् । भीष्म: कृपश्च कर्णश्र महेष्वासा: समागता:,ये आचार्य द्रोण खड़े हैं। उनके बाद उन्हींके पुत्र अश्वत्थामा हैं। उधर पितामह भीष्म दिखायी देते हैं। इधर कृपाचार्य हैं और वह कर्ण है। ये सब महान् धनुर्धर यहाँ युद्धके लिये आये हैं
“看哪,德罗那师已列阵而立;其后便是其子阿湿婆他摩。那边可见祖父毗湿摩;这边是克利帕师,而那位便是迦尔纳。诸位皆为大弓手,齐集于此,为战而来。”
अजुन उवाच