कृप-अर्जुन रथयुद्धम्
Kṛpa–Arjuna Chariot Engagement
इस प्रकार श्रीमह्याभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तरयोग्रहके समय द्रोणवाक्यसम्बन्धी इक्यावनवाँ अध्याय पूरा हुआ,प्रतियुध्येम समरे सर्वशस्त्रभूतां वरम् । तस्माद् यदत्र कल्याणं लोके सद्भिरनुछितम् । तत् संविधीयतां शीघ्र मा वो हार्थो& भ्यगात् परम् इस समय रणभूमिमें समस्त शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ अर्जुनके साथ हमें युद्ध करना है। इसलिये जगतमें साधुपुरुषोंद्वारा आचरित जो कल्याणकारी उपाय है, उसे शीघ्र करना चाहिये, जिससे तुम्हारा यह गोधन शत्रुके हाथमें न जाय
pratiyudhyema samare sarvaśastrabhūtāṃ varam | tasmād yad atra kalyāṇaṃ loke sadbhir anuṣṭhitam | tat saṃvidhīyatāṃ śīghraṃ mā vo hārtho 'bhyagāt param ||
德罗那说道:“如今我们必须在战场上与阿周那交锋,他是诸持兵者之最。故此,世间贤德之人所行的一切吉祥而正当之策——当即刻筹办,使你们的财物,这群牛,不至尽数落入敌手。”
द्रोण उवाच