अजुन उवाच एकान्तं रथमास्थाय पद्धयां त्वमवपीडयन् । दृढं च रश्मीन् संयच्छ शड्खं ध्मास्याम्यहं पुन:,अर्जुन बोले--राजकुमार! अब तुम रथपर अच्छी तरह जमकर बैठ जाओ और अपनी टाँगोंसे बैठनेके स्थानको जकड़ लो। साथ ही घोड़ोंकी रासको दृढ़तापूर्वक पकड़े रहो। मैं फिर शंख बजाऊँगा
阿周那说道:“王子啊,如今你要稳稳坐在战车上,用双腿紧紧夹住座位;并牢牢握住缰绳。我将再吹一次海螺。”
अजुन उवाच