आचार्य-क्षमा, देśa–kāla-नīti, तथा भेद-दोषः
Teacher-Reconciliation, Timing-Policy, and the Fault of Factionalism
धनुषश्चैव निर्घोष: श्रुतपूर्वो न मे क्वचित् । अस्य शड्खस्य शब्देन धनुषो नि:स्वनेन च,धनुषकी ऐसी टंकार भी पहले कभी मैंने नहीं सुनी थी। इस शंखके भयानक शब्दसे, धनुषकी अनुपम टंकारसे, ध्वजामें निवास करनेवाले मानवेतर प्राणियोंके घोर शब्दसे तथा रथकी भारी घर्घराहटसे भी डरकर मेरा हृदय बहुत व्याकुल हो उठा है
dhanuṣaś caiva nirghoṣaḥ śrutapūrvo na me kvacit | asya śaṅkhasya śabdena dhanuṣo niḥsvanena ca |
乌多罗说道:“我从未听过弓弦竟能发出如此雷霆般的轰鸣。这海螺的长啸与弓弦的铮鸣震撼了我;我的心因恐惧而剧烈翻涌。”
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