Virāṭa Rescued from Suśarmā; Night Battle and Royal Gratitude (विराटमोक्षणं सुशर्मवधाभिमुखं च)
ततो रथाभ्यां रथिनौ व्यतीयतुरमर्षणौ । शरान् व्यसृजतां शीघ्र॑ं तोयधारा घना इव,क्रोधमें भरे हुए वे दोनों रथी अपना-अपना रथ बढ़ाकर निकट आ गये और शीघ्रतापूर्वक एक दूसरेपर बाणोंकी झड़ी लगाने लगे, मानो दो मेघ जलकी धाराएँ बरसा रहे हों
tato rathābhyāṃ rathinau vyatīyatur amarṣaṇau | śarān vyasṛjatāṃ śīghraṃ toyadhārā ghanā iva ||
毗湿摩波耶那说:于是两位车战勇士,凶猛而不容受辱,驱车相逼,迅疾互射箭雨,宛如两团雨云倾泻水流。此景昭示:怒火一旦点燃,技艺与勇武便化作战场上的暴烈风暴。
वैशम्पायन उवाच