Nakula’s Reception in Matsya: Appointment as Aśvasūta
Horse-master
अपु॒स्त्वमप्यस्य निशम्य च स्थिरं ततः कुमारीपुरमुत्ससर्ज तम् | वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! तदनन्तर मत्स्यनरेशने बृहन्नलाकी गीत, नृत्य और बाजे बजानेकी कलाओंमें परीक्षा करके अपने अनेक मन्त्रियोंसे यह सलाह ली कि इसे अन्तःपुरमें रखना चाहिये या नहीं। फिर तरुणी स्त्रियोंद्वारा शीघ्र ही उनके नपुंसकत्वकी जाँच करायी। जब सब तरहसे उनका नपुंसक होना ठीक प्रमाणित हो गया, तब यह सुन- समझकर उन्होंने बृहन्नलाको कन्याके अन्तःपुरमें जानेकी आज्ञा दी
apustvam apy asya niśamya ca sthiraṁ tataḥ kumārīpuram utsasarja tam |
毗舍摩波耶那说:国王既已听闻并确证其确为阉人,便将他送入少女们的内宫深处。
वैशम्पायन उवाच