इन्द्रवृत्रयुद्धवर्णनम्
Indra–Vṛtra Conflict and the Adversaries’ Tapas-Targeting Counsel
विष्णु: स्वेन शरीरेण रावणस्य वधाय वै | पश्यामस्तमयोध्यायां जातं दाशरथिं तत:,लोमशजीने कहा--राजेन्द्र! तुम दशरथनन्दन श्रीराम तथा परम बुद्धिमान् भृगुनन्दन परशुरामजीका चरित्र सुनो। पूर्वकालमें महात्मा राजा दशरथके यहाँ साक्षात् भगवान् विष्णु अपने ही सच्चिदानन्दमय विग्रहसे श्रीरामरूपमें अवतीर्ण हुए थे। उनके अवतारका उद्देश्य था--पापी रावणका विनाश। अयोध्यामें प्रकट हुए दशरथनन्दन श्रीरामका हम लोग प्राय: दर्शन करते रहते थे
viṣṇuḥ svena śarīreṇa rāvaṇasya vadhāya vai | paśyāmas tam ayodhyāyāṃ jātaṃ dāśarathiṃ tataḥ ||
罗摩沙说道:“毗湿奴亲自取自身之形而降生,正是为了诛灭罗波那(Rāvaṇa)。在阿逾陀(Ayodhyā),我们一次又一次得以瞻仰达沙罗陀之子——罗摩。”
लोमश उवाच